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उत्तर प्रदेश प्रशासन में मानवता की मिसाल: बागपत की DM अस्मिता लाल ने ठंड में कांपते स्ट्रीट डॉग्स के लिए बनाया देसी “सुरक्षा कवच”, ड्रम-टायर से तैयार हुए शेल्टर होम, अंदर गद्दों से मिलेगी गर्माहट!

ने ठंड में ठिठुरते बेजुबान स्ट्रीट डॉग्स को लेकर एक अनोखी, मौलिक और व्यावहारिक मुहिम शुरू की है।

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🐾उत्तर प्रदेश प्रशासन में मानवता की मिसाल: बागपत की DM अस्मिता लाल ने ठंड में कांपते स्ट्रीट डॉग्स के लिए बनाया देसी “सुरक्षा कवच”, ड्रम-टायर से तैयार हुए शेल्टर होम, अंदर गद्दों से मिलेगी गर्माहट!🐾

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय पहल का ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र में मानवता का नया अध्याय लिख दिया। अस्मिता लाल, जो जिला प्रशासन बागपत की कमान संभाल रही हैं, ने ठंड में ठिठुरते बेजुबान स्ट्रीट डॉग्स को लेकर एक अनोखी, मौलिक और व्यावहारिक मुहिम शुरू की है।

कड़ाके की सर्दी के बीच जब तापमान लगातार गिर रहा है और इंसान भी अलाव-जैकेट का सहारा ढूंढ रहा है, ऐसे में DM ने सड़कों पर रहने वाले कुत्तों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील कदम उठाते हुए प्लास्टिक ड्रम और पुराने टायरों से विशेष शेल्टर होम तैयार करवाए हैं। इन शेल्टरों के निर्माण की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद बागपत और टीम एनिमल केयर बागपत को दी गई, जिन्होंने DM के निर्देशन में स्थानीय संसाधनों से टिकाऊ और गर्म शरण स्थल तैयार किए।

इन ड्रम-टायर शेल्टरों के अंदर ठंड से बचाव के लिए मुलायम गद्दे, पुराने कंबल और फ्लेक्सिबल फोम लेयर बिछाई गई हैं, ताकि सर्द हवाओं और ठंडी जमीन से होने वाली कंपकंपी को रोका जा सके। DM का मानना है कि सुरक्षा केवल इंसानों तक सीमित नहीं, प्रशासन को अपने क्षेत्र के हर जीव के प्रति संवेदनशील होना चाहिए, और इसी सोच ने इस पहल को सरकारी कार्रवाई नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अभियान बना दिया।

शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों, बस स्टॉप और मंदिर-मार्गों के पास इन शेल्टरों को रणनीतिक स्थानों पर रखा गया है, ताकि सबसे अधिक प्रभावित स्ट्रीट डॉग्स आसानी से इन तक पहुँच सकें। DM ने इस काम की निगरानी खुद निगरानी पोर्टल बागपत के माध्यम से की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शेल्टर मानकों के अनुरूप और समय से सक्रिय हों।

जिलेवासियों और सामाजिक संगठनों ने DM की इस पहल को खुले दिल से सराहा। विश्व हिंदू परिषद, बागपत इकाई, भारत रक्षक संघ और स्थानीय पशु-प्रेमी जनसमूहों ने इसे दुर्लभ मानवतावादी कदम करार दिया और इसे पूरे उत्तर प्रदेश में यथासंभव लागू करने की मांग भी अनौपचारिक रूप से उठने लगी है।

यह पहल इस बात की भी याद दिलाती है कि प्रशासनिक मजबूत इच्छाशक्ति, स्थानीय जुगाड़ और मानवीय दृष्टि मिल जाएं तो वही सरकारी सिस्टम, जो अक्सर संवेदना से दूर दिखता है—दिल जीत लेने वाले मानवीय रूप में भी सामने आ सकता है।

संदेश साफ है— यह केवल ड्रम नहीं, बागपत के हर उस स्ट्रीट डॉग के लिए ठंड में जीवन बचाने वाला एक छोटा घर है, जो रात के अँधेरे में बिना छत के जिंदगी काटता रहा है।

✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक जॉन सिंह – वरिष्ठ संवाददाता
संपर्क: 8217554083**
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